ग्रामीण भंडार योजना | Gramin Bhandar Yojana in Hindi

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1. परिचय: यह सत्य है कि छोटे किसान की आर्थिक स्थिति इतनी सुदृढ़ नहीं होती कि वे बाजार में अनुकूल भाव मिलने तक अपनी उपज को अपने पास रख सकें। देश में इस समस्या के निदान के लिए आवश्यक है कि कृषक समुदाय को भंडारण की वैज्ञानिक सुविधाएँ प्रदान की जाएं, ताकि उपज की हानि और क्षति को रोका जा सके। अन्न भंडार योजना के साथ-साथ किसानों की ऋण संबधी जरूरतें पूरी की जा सकें। इससे किसानो को ऐसे समय मजबूरी में अपनी उपज बेचने से रोका जा सकता है, जब बाजार में उसके दाम कम हों। ग्रामीण गोदामों का नेटवर्क बढ़ाने से छोटे किसानों की भंडारण क्षमता बढ़ाई जा सकती है। इससे वे अपनी उपज उस समय बेच सकेंगे जब उन्हें बाजार में लाभकारी मूल्य मिल रहा हो और किसी प्रकार के दबाव में बिक्री करने से उन्हें बचाया जा सकेगा। इसी समस्या के मद्देनजर 2001-02 में ग्रामीण गोदामों के निर्माण के ग्रामीण भंडार योजना नामक पूंजी निवेश सब्सिडी कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया।

2. ग्रामीण भंडार योजना का उद्देश्य: Gramin Bhandar Yojana के मुख्य उद्देश्यों में सर्वप्रथम कृषि उपज और संसाधित कृषि उत्पादों के भंडारण की किसानों की जरूरतें पूरी करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में वैज्ञानिक भंडारण क्षमता का निर्माण, कृषि उपज के बाजार मूल्य में सुधाय के लिए ग्रेडिंग, मानकीकरण और गुणवत्ता नियंत्रण को बढ़ावा देना। वित्त व्यवस्था और बाजार ऋण सुविधा प्रदान करते हुए फसल कतई के तत्काल बाद के संकट और दबावों के कारण फसल बेचने की किसानों की मज़बूरी को समाप्त करना। ग्रामीण गोदामों के निर्माण की योजना देशभर में व्यक्तियों, किसानों, कृषक/उत्पादक समूहों, प्रतिष्ठानों, गैर सरकारी संगठनों, स्वयं सहायता समूहों, कंपनियों, निगमों, सहकारी संगठनों, परिसंघों और कृषि उपज विपणन समिति द्वारा शुरू की जा सकती है।

3. गोदाम का स्थान: Gramin Bhandar Yojana के अंतर्गत उद्यमी स्वतंत्र रूप से किसी भी स्थान पर गोदाम का निर्माण कर सकता है। परन्तु गोदाम का स्थान नगर निगम क्षेत्र की सीमाओं से बाहर होना चाहिए।

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4. गोदाम का आकार: गोदाम की क्षमता का निर्णय उद्यमी द्वारा किया जाएगा।  लेकिन इस कार्यक्रम के अंतर्गत सब्सिडी प्राप्त करने के लिए गोदाम की क्षमता 100 टन से कम और 30 हजार टन से अधिक नहीं होनी चाहिए। 50 टन क्षमता तक के ग्रामीण गोदाम भी इस कार्यक्रम के अंतर्गत विशेष मामलो के रूप में सब्सिडी के पात्र हो सकते हैं। पर्वतीय क्षेत्र में 25 टन क्षमता के आकार वाले ग्रामीण गोदाम भी सब्सिडी के हकदार होंगे।

  • गोदाम नगर निगम के बाहर होना चाहिए।
  • न्यूनतम क्षमता     : 50 मैट्रिक टन
  • अधिकतम क्षमता  : 10000 मैट्रिक टन
  • गोदाम की ऊंचाई   : 4-5 मीटर से कम नहीं होनी चाहिए।
  • गोदाम की क्षमता  : 1 क्यूबिक मीटर क्षेत्र 0-4 मैट्रिक टन

4. वैज्ञानिक भंडारण के लिए शर्तें: कार्यक्रम के अनुसार निर्मित गोदाम का ढांचा इंजीनियरों द्वारा प्रमाणित होना चाहिए। उद्यमी को गोदाम के प्रचालन के लिए लाइसेंस प्राप्त करना पद सकता है, यदि राज्य गोदाम अधिनियम के अंतर्गत लाइसेंस अनिवार्य है। 1000 टन क्षमता या उससे अधिक के ग्रामीण गोदाम केंद्रीय भंडारण निगम से प्रमाणित होने चाहिए।

  • CPWD के निर्देशानुसार गोदाम का निर्माण
  • कीटाणुओं से सुरक्षा
  • पक्षियों से सुरक्षा जाली वाली खिड़कियां/रोशनदान
  • सुगम पक्की सड़क
  • जल निकासी की समुचित व्यवस्था
  • अग्निशमन/सुरक्षा व्यवस्था
  • सामान लादने और उतारने की उचित व्यवस्था

5. ऋण से सबंधित सहायता: इस कार्यक्रम के अंतर्गत सब्सिडी संस्थागत ऋण से संबंध होता है। ऋण ऐसी परियोजनाओं के लिए दिया जाता है जो वाणिज्यिक बैंकों, ग्रामीण बैंकों, राज्य सहकारी बैंकों, ग्रामीण विकास बैंकों, आदि से प्रमाणित की गई हो। कार्यक्रम के अंतर्गत सब्सिडी :- चार दीवारी, सड़क निर्माण, प्लेटफार्म, जल निकासी प्रणाली के निर्माण, धर्मकांटा, ग्रेडिंग, पैकजिंग, गुणवत्ता प्रमाणन, अन्य सुविधाओं सहित गोदाम के निर्माण के लिए पूंजी दी जाती है।

6. बीमा: गोदाम के बीमे के लिए जिम्मेवारी गोदाम के मालिक की होगी।

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