करणी सेना/ राजपूत करणी सेना का इतिहास Rajput Karni Sena

History of Rajput Karani Sena and Establishment of Karani Sena

करणी सेना के स्थापना एवं करणी सेना का इतिहास: राजपूत करणी सेना की स्थापना लोकेन्द्र सिंह कालवी ने वर्ष 2006 में की थी। करणी सेना का नाकरण राजस्थान के बीकानेर के पास स्थित करणी माता के मंदिर के नाम से किया गया है। करणी माता का मंदिर विश्व में चूहों की विशेषता के लिए प्रसिद्ध है। प्रारम्भ में करणी सेना का उद्देश्य भारतीय जनता पार्टी की नीतियों का बिरोध करना था।

करणी सेना का उद्देश्य Aim of Karani Sena: करणी सेना की स्थापना का मुख्य उद्देश्य राजपूत आरक्षण, राजपूत बिरादरी में एकता स्थापित करना, राजपूत महिला सशक्तिकरण, महिलाओं की शिक्षित करना एवं स्वावलम्बी बनाना था।

करणी सेना का राजनीतीकरण- Rajput Karni Sena & Politics:  वर्ष 2003 में करणी सेना के संस्थापक लोकेन्द्र सिंह कालवी ने भारतीय जनता पार्टी के वागी नेता देवी सिंह भाटी से मिलकर सामाजिक न्याय मंच बनाया था और इसी मंच से 2003 में चुनाव भी लड़ा था, जिसमे सफलता मंच को सिर्फ एक सीट मिल पाई एवम देवी सिंह भाटी चुनाव जीतकर भजपा में शामिल हो गए। महारानी वसुंधरा राजे से लोकेन्द्र सिंह कालवी का सदैव 36 का अकड़ा रहने के कारण उन्होंने ने राजपूत करणी सेना का सहारा लिया एवं राजस्थान में राजपूत आरक्षण के लिए अनेक बार बड़ी संख्या में सभाएं एवं रैलियां की, किन्तु राजपूतों में बिखराव के कारण कुछ भी हासिल नहीं हो सका। करणी सेना एवम लोकेन्द्र सिंह कालवी राजपूत समाज के उत्थान एवं आरक्षण के मुद्दे पर राजपूत समाज को एकत्र करने की मांग बुलंद करते रहे हैं। यहाँ तक श्री कल्वी ने अपनी आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर पहुँचाने के लिए उन्हें अनेक राजनितीतक पार्टियों का सहारा लेना पड़ा है।

करणी सेना एवम कांग्रेस Rajput Karani Sena & Congress: श्री लोकेन्द्र सिंह कालवी ने वर्ष 2008 में राजस्थान विधान सभा चुनाव से पहले इस उम्मीद में कांग्रेस ज्वाइन कर लिए की उन्हें कांग्रेस से लोकसभा का चुनाव लड़ने की उम्मीदवारी मिल जाएगी, परन्तु कांग्रेस से उन्हें टिकट नहीं मिल पाया और निरसा ही हाथ लगी। उन्हें 6 वर्ष तक किसी भी पार्टी का सहारा नहीं मिला, वे निरन्तर करणी सेना का प्रचार प्रसार करते रहे।

राजपूत करणी सेना एवं बहुजन समाज पार्टी Karani Sena & BSP: लोकेन्द्र सिंह कालवी वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव से पहले इस आशा के साथ बसपा में शामिल हो गए की उन्हें लोकसभा का चुनाव लड़ने के लिए टिकट मिल जायेगा, किन्तु इस बार भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी।

जनता दल Karni Sena & Janta Dal: वर्ष 1990-1991 में लोकेन्द्र सिंह कालवी के पिता श्री कल्याण सिंह लख्वी राजस्थान के बाड़मेर लोकसभ से जीतकर आये थे एवं श्री चंद्रशेखर की सरकार में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री का पद ग्रहण किया था। लोकेन्द्र सिंह कालवी ने एक बार बाड़मेर जैसलमेर सीट से लोकसभा का चनाव लड़ था कुण्टू वे चुनाव हर गए थे।

करणी सेना का मुख्य केंद्र-Area of Karni Sena: राजपूत करणी सेना ने राजस्थान के सभी जनपदों में कार्यकारणी बना रखी है एवं वर्तमान समय में करणी सेना कार्यकर्ता सम्पूर्ण भारत में हैं लईकिन करनी सेना का केंद्र विन्दु राजस्थान का जयपुर, नागौर, सीकर, पाली, चित्तौड़गढ़, कोटा, बाड़मेर, जैसलमेर आदि जिले हैं।

विवादों में घिरी करणी सेना- Rajput Karni Sena Dispute: : करणी सेना का नाम अधिकतर अपने उद्देश्य से हटकर गलत कारणों से सुर्ख़ियों में आता रहा है। सन 2008 में करणी सेना आशुतोष गोवारिकर की फिल्म जोधा अकबर बिरोध के निशाने पर थी, जिसके कारण यह फिल्म राजस्थान में रिलीज़ नहीं हो पाई थी। यहाँ तक कि ‘जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल‘ के दौरान जोधा अकबर के विवाद को लेकर करणी सेना ने एकता कपूर पर हमला बोल दिया था, तथा पत्रकारों से मारपीट करके जयपुर जी न्यूज़ चैनल के दफ्तर को तोड़ फोड़ डाला था। राजपूत करणी सेना का दावा था कि इतिहास के हिसाब से जोधा, अकबर के बेटे की पत्नी थी न की अकबर की, जैसे फिल्म में दिखाया गया है।

फिल्म पदमावत एवं करणी सेना-Move Padmavat & Karni Sena: इतिहास के पन्नों से छेड़-छाड़ के बिरोध में राजपूत करणी सेना ने 21 जनवरी 2017 को जयपुर में संजय लीला भन्सारी की फिल्म “पदमावती” के बिरोध में उग्ररूप धारण कर लिया एवं गुंडागर्दी के साथ फिल्म निर्माता संजय लीला भन्साली  पर हमला करके मारपीट की तथा फिल्म सेट की तोड़ फोड़ की। वर्तमान समय में भी करणी सेना का तांडव जारी है, सरकारी एवं सार्बजनिक वाहनो को आग के हावले करना, शिनेमाघरों की तोड़फोड़ करना, जगह, जगह पर धरने देना, संसद को उड़ा देने की धमकी के साथ साथ फिल्म निर्माता संजय लीला भन्सारी, दीपिका पादुकोण एवं अन्य कलाकारों को जान से मारने के धमकियाँ आम बात हो गयी है। हलाकि देश के सर्वोच्च अदालत ने फिल्म में मामूली बदलाव के साथ दिनांक 25 जनवरी 2018 से देश के सभी सिनेमाघरों में रिलीज़ करने का आदेश दे दिया है।

सुझाव Suggestions: देश की सर्वोच्च अदालत के आदेश एवम कानून का पालन करते हुए हम सब को देश की एकता एवं अखंडता के लिए अपने मूल उद्देश्य से नहीं हटना चाहिए। हमारा देश सदियों से गुलाम क्यों रहा है? जिसका कारण हम सब स्वयं हैं, हमारी रूढ़िवादी ब्यवस्था ने समूचे देश को जाति पाँति, ऊंच-नीच, भेद-भाव के कुचक्र में ऐसा डाल रखा है कि हमें आगे की सोचने की फुरसत नहीं है। हमारे राजाओं महाराजाओं ने आपस में लड़कर अपनी एवं अपने देश की ऊर्जा का विनाश किया है, यहाँ तक कि “महाभारत” भी आपस में ही लड़ा गया था। सैकड़ो वर्ष गुलाम रहने के बावजूद भी क्या हम नहीं सुधरेगें? इतिहासकार, राजनेता, बुद्धिजीवियों, साहित्यकारों एवं फिल्मनिर्माताओं से अनुरोध है कि पुरानी परम्पराओं से सीख लेते हुए नए समाज के श्रजन में सहयोग करें, ताकि आने वाली पीढ़ी को गर्व हो। धनोपार्जन के उद्देश्य से ऐसा कोई विष समाज में न डालें जिससे देश एवं समाज को क्षति हो।

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